आपको बता दे कि हाल ही में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल का माफ़ी माँगने का दौर लगातार जारी है मजीठिया के बाद उन्होंने कपिल सिब्बल ओर नितिन गडकरी से भी माफ़ी माँग ली है दिल्ली की जनता के लिए और समय देने और कुछ कल्याणकारी कार्यों को करने के लिए वो लगातार लोगों से माफ़ी माँग रहे है ताकि अपने ऊपर चल रहे केसों को ख़त्म किया जा सके और दिल्ली की जनता के लिए और समय निकाल सकें ! क्योकि इन केसों की वजह से वो अपना पूरा ध्यान जनता की सेवा में नहीं लगा पा रहे थे ,अब उन्होंने अपनी रणनीति में फेरबदल किया है जिसके तहत वो अब भ्रस्ट लोगों से लड़ने की बजाय पहले भ्रस्ट सिस्टम से लड़ेंगे !क्योकि आज के सिस्टम में ईमानदारी को साँस लेना तक दूभर हो रहा है ! कुछ बुद्धिजीवी लोग केजरीवाल की इन माफियों को मास्टर स्ट्रोक मान रहे है उनका कहना है कि आज वो क़ानूनी पचड़ों से निकल, कल भरस्टाचार पर बड़ा प्रहार करेंगे ! ओर माफ़ी मांगने से कोई छोटा नहीं होता। आप जानते है आज केजरीवाल को माफ़ी मांगने पर भी इतना बदनाम क्यों किया जा रहा है आपको बता दे कि हमारे देश में राजनीती में माफ़ी माँगने का रिवाज नहीं है ,भारत...
भारत एक प्रजातान्त्रिक देश है । प्रजातान्त्रिक व्यवस्था में जनता द्वारा जनता के कल्याण के लिए एवं जनता द्वारा शासन किया जाता है । प्रजातान्त्रिक शासन प्रणाली में सभी नागरिकों को यह अधिकार होता है किए उनकी आवाज को सुना जाए चाहे वे किसी भी धर्म, जाति, लिंग या क्षेत्र के हों ।भारत में संधीय शासन प्रणाली अपनाई गई है । संघीय शासन प्रणाली में नीतियाँ एवं कार्यक्रम राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर बनाए जाते हैं जिसके कारण क्षेत्रीय समस्याएं या तो उपेक्षित हो जाती हैं या उन पर कम ध्यान दिया जाता है । ऐसी परिस्थिति में उन क्षेत्रीय समस्याओं या मुद्दों को आवाज देने और उन पर राष्ट्र का ध्यान आकर्षित करने के लिए क्षेत्रीय दलों का उदय होता है ।प्रजातान्त्रिक शासन प्रणाली में क्षेत्रीय दलों की भूमिका महत्त्वपूर्ण होती है क्योंकि ये न केवल क्षेत्रीय समस्याएँ या मुद्दे जो उपेक्षित हैं कि तरफ देश का ध्यान आकर्षित करती हैं बल्कि उसके निवारण के लिए प्रयास भी करती हैं ।भारत में बहु-दलीय पार्टी व्यवस्था है जिसमें छोटे क्षेत्रीय दल अधिक प्रबल हैं। राष्ट्रीय पार्टियां वे हैं जो चार या अधिक राज्यों में मान...
मेट्रोमैन श्रीधरन के खोखले तर्क खोखला तर्क नंबर 1 - महिलाओं की मुफ्त यात्रा से दिल्ली मेट्रो को आर्थिक रूप से नुकसान होगा! जब महिलाओं की मुफ्त यात्रा का पूरा खर्चा दिल्ली की केजरीवाल सरकार द्वारा वहन किया जायेगा तो दिल्ली मेट्रो को इससे आर्थिक रूप से नुकसान कैसे होगा ? ये हमारी सोच से परे है आखिर किस आधार पर श्रीधरन ये बातें कर रहे है ? ये ताज्जुब की बात है कि श्रीधरन इतने बड़े टेक्नोक्रेट होने के बावजूद थोड़ा सा गणित नहीं कर पा रहे! या फिर वो जानबूझ कर जनता को बरगलाने की कोशिस कर रहे है? ताकि भाजपा को दिल्ली चुनावों में नुकसान न झेलना पड़े ! जब महिला सवारियों के खर्चे की भरपाई दिल्ली सरकार कर रही है तो फिर मेट्रो को असल में लाभ होना चाहिए इससे नुकसान कैसे होगा यह कॉमन सेंस की बात है ! वास्तव में यह खेल भाजपा को चुनावों में होने वाले नुकसान की फिक्र जाहिर करता है न कि दिल्ली मेट्रो में होने वाले आर्थिक नुकसान की !! खोखला तर्क नंबर 2 : किसी अन्य देश में महिलाओं के लिए फ्री परिवहन की सुविधा नहीं है इसलिए दिल्ली मेट्रो में भी नहीं हो सकता यह सवाल आपको कितना तर्कस...
किसी भी भाषा को सिखने के लिए हमे लगातार उसे बोलने की कोशिश करना उस भाषा को सीखने में अहम भूमिका निभाता है जब हम अपनी मातृभाषा को सीखते हैं तो क्या हमें उसकी ग्रामर के बारे में कोई ज्ञान होता है जिसका जबाब है नहीं ,लेकिन उसके बावजूद भी हम इसको बोल पाते है किसी भी भाषा का बोलना उसके अभ्यास पर निर्भर करता है आप जितनी प्रैक्टिस करोगे उतना ही निपुण होते जाओगे। GOOGLE कुछ लोगों को देखा होगा कि वह इंग्लिश को पढ़कर समझ सकते हैं और वह इंग्लिश में ईमेल बहुत अच्छी तरह से लिख सकते हैं लेकिन वह बोल नहीं पाते इसका मतलब यह होता है कि उनको इंग्लिश बोलने की आदत नहीं है और वह किसी के भी सामने इंग्लिश बोलने में संकोच महसूस करते हैं उनको यह लगता है कि मैं इंग्लिश बोलूंगा तो गलतियां होंगी और जिससे लगेगा कि वह मूर्ख है इस संकोच की वजह से वह इंग्लिश बोलने का प्रयास ही नहीं करते हैं यह इंग्लिश बोलने की दिशा में सबसे बड़ी रुकावट है आप चाहे कुछ भी करिए आप इंग्लिश तब तक नहीं बोलेंगे तब तक आपको इंग्लिश आएगी नहीं,आपको किसी भी तरह से इंग्लिश बोलनी ही पड़ेगी तभी आप लोगों के बीच में इंग्लिश बोल पाएंगे GOOGL...
जानिए कैसे ये 10 पॉइंट बताते है कि सरकार का असल मकसद जान बचाना नहीं बल्कि पैसे कमाना है ! 1.अगर सच में लोगों की जान बचाना सरकार की प्राथमिकता होती तो चालान से कमाए पैसों से सबसे पहले रोड एक्सीडेंट में घायल लोगों के लिए किसी भी सरकारी या प्राइवेट अस्पताल में उसका फ्री इलाज निर्धारित करती ताकि सही मायनों में उसकी जान बचाई जा सके क्योंकि एक्सीडेंट कभी कागजात देख कर नही होते, किसी के पास सारे कागजात होने पर एक्सीडेंट न हो इसकी कोई गारंटी नही होती। 2.हेलमेट के चालान की वजह वो हेलमेट देती। 3. रोड एक्सीडेंट में घायल लोगों को समय पर मेडिकल सुविधा मिले इसके लिए जरूरी कदम उठाती जैसे दिल्ली में घायल व्यक्ति को अस्पताल ले जाने वाले को 2000 रुपये की राशि दी जाती है या कुछ अलग से एम्बुलेंस की व्यवस्था करती जो एक्सीडेंट में घायल लोंगो को तय समय के अंदर मेडिकल सुविधा उपलब्ध कराती। 4.रोड में बने तलाबनुमे गड्डों को जल्द से जल्द भरने का आदेश पारित करती। 5.रोड पर रात के समय उजाले की व्यवस्था करने का आदेश पारित करती 6 कम से कम खुले गटर और मैनहोल के लिए 2 शब्द बोले जाते। 7 अंडरपास और रो...
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