Posts

Showing posts with the label Bharat ki Rajneeti

★आज के जमाने में कुछ शब्दों का नवनिकरन हो गया है जैसे विकलांग का दिव्यांग और चमचों का भक्त★★

आज के जमाने में कुछ शब्दों का नवनिकरन हो गया है जैसे विकलांग का दिव्यांग और चमचों का भक्त लेकिन सिर्फ नाम बदल जाने से दोनों की अंदरूनी पीड़ा कम और ख़त्म नही हो जाती।

डॉ कुमार विश्वास का अरविन्द केजरीवाल के कपड़ो पर सवाल उठाने वालों को करारा जबाब

अरविन्द केजरीवाल की सादगी (मुफलर और सादा कपड़ों )पर जब बीजेपी ने ऊँगली उठाई  तब डॉ कुमार विश्वास ने मुहतोड़ जवाब दिया। हम उस देश के वासी हैं जहाँ आदमी की पहचान चरित्र से होती है कपड़ों से नहीं। 10 लाख के सूट पहनने से आदमी जैंटलमैन नही बन जाता। गांधी जी भी खादी की धोती में अध्नंगन अवस्था में रहते थे लेकिन उनकी पहचान पुरे विश्व में अपने चरित्र से थी।

डिग्री पर राजनीति नही होनी चाहिए...बीजेपी

डिग्री पर राजनीति नही होनी चाहिए...बीजेपी तो तोमर के पिछे दिल्ली पूलिस को क्या देश का मनोरंजन करने के लिए लगाया था। # स्मृति ईरानी # नरेंद्र मोदी।

भारतीय राजनीति में भाषा के गिरते हुए स्तर का जिम्मेदार कौन?

भारतीय राजनीति में भाषा के गिरते हुए स्तर का जिम्मेदार कौन? श्री अरुण जेटली ने एक फेसबुक पोस्ट लिखी है जिसका प्रारंभ उन्होंने संसद में जीएसटी को लेकर चल रहे गतिरोध के साथ किया है। लेकिन उनकी यह पोस्ट मुख्यतः राजनीतिक बहस के दौरान भाषा में आ रही गिरावट का उल्लेख करती है। प्रारंभिक और सैद्धांतिक रूप से सभी राजनीतिक व्यक्तियों को उनके इस विचार का स्वागत करना चाहिये। इस बात में कोई शक नहीं है कि हाल के समय में राजनीतिक बहस का स्तर लगातार गिरता जा रहा है और अधिकतर बहस एक दूसरे की आलोचना के स्थान पर अपशब्दों पर केंद्रित होकर रह गई हैं। असंसदीय भाषा और भावों का प्रयोग इतना आम हो गया है कि इस बात में अंतर करना काफी मुश्किल हो गया है कि क्या संसदीय है और क्या नहीं। इसे एक प्रकार से राजनीति का ‘मानसिक दिवालियापन’ कहा जा सकता है। जिस प्रकार अपराधी छवि कि लोग निरंतर राजनीति में आ रहे हैं और विभिन्न सरकारों और राजनीतिक दलों में महत्वपूर्ण स्थान पा रहे हैं उसके बाद ऐसा होना कोई अप्रत्याशित नहीं है। संभ्रातवादी स्पष्टीकरण के रूप में इसे ‘‘हमारी राजनीति के अधीनस्थीकरण’’ का प्रतिफल कह सकते हैं और स...

भारत के प्रधानमंत्री आजादी से लेकर अब तक

भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री: श्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी भारत के गणराज्य के पहले प्रधानमंत्री: जवाहर लाल नेहरु पहली महिला प्रधानमंत्री: इंदिरा गाँधी भारत के स्वतंत्रता से अब तक 15 प्रधानमंत्री (14 व्यक्ति) हुए देश में। प्रधानमंत्री देश का प्रतिनिधि और भारतीय सरकार का मुख्य कार्यकारी अधिकारी होता है। प्रधानमंत्री, संसद में बहुमत प्राप्त पार्टी का नेता होता है। ये देश के राष्ट्रपति का मुख्य सलाहकार होने के साथ ही मंत्रीपरिषद का मुखिया भी होता है। पंडित जवाहर लाल नेहरु को सबसे ज्यादा समय तक प्रधानमंत्री के रुप में देश की सेवा करने का गौरव प्राप्त है जो कि 1964 में अपनी मृत्यु तक इस पद पर रहे। भारत के प्रधानमंत्री कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, आणविक ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग, नियोजन मंत्री और कैबिनेट की नियुक्ति कमेटी के प्रभारी आदि होते है। वो मंत्रीपरिषद का निर्माण, विभागों का बँटवारा, कैबिनेट कमेटी के अध्यक्ष, मुख्य नीति संयोजक तथा राष्ट्रपति के सलाहकार का कार्य करते है। नीचे हम आपकी जानकारी के लिये स्वतंत्रता से लेकर अभी तक प्रधानमंत्रीयों के नाम उनके विवरण सहित दे रहे है। भार...

भारत में क्षेत्रीय राजनीतिक दलों की भूमिका जिसे आज के दौर में नकारा नही जा सकता।

भारत एक प्रजातान्त्रिक देश है । प्रजातान्त्रिक व्यवस्था में जनता द्वारा जनता के कल्याण के लिए एवं जनता द्वारा शासन किया जाता है । प्रजातान्त्रिक शासन प्रणाली में सभी नागरिकों को यह अधिकार होता है किए उनकी आवाज को सुना जाए चाहे वे किसी भी धर्म, जाति, लिंग या क्षेत्र के हों ।भारत में संधीय शासन प्रणाली अपनाई गई है । संघीय शासन प्रणाली में नीतियाँ एवं कार्यक्रम राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर बनाए जाते हैं जिसके कारण क्षेत्रीय समस्याएं या तो उपेक्षित हो जाती हैं या उन पर कम ध्यान दिया जाता है । ऐसी परिस्थिति में उन क्षेत्रीय समस्याओं या मुद्दों को आवाज देने और उन पर राष्ट्र का ध्यान आकर्षित करने के लिए क्षेत्रीय दलों का उदय होता है ।प्रजातान्त्रिक शासन प्रणाली में क्षेत्रीय दलों की भूमिका महत्त्वपूर्ण होती है क्योंकि ये न केवल क्षेत्रीय समस्याएँ या मुद्दे जो उपेक्षित हैं कि तरफ देश का ध्यान आकर्षित करती हैं बल्कि उसके निवारण के लिए प्रयास भी करती हैं ।भारत में बहु-दलीय पार्टी व्यवस्था है जिसमें छोटे क्षेत्रीय दल अधिक प्रबल हैं। राष्ट्रीय पार्टियां वे हैं जो चार या अधिक राज्यों में मान...

ये हैं भारतीय राजनीति की 15 सबसे ताकतवर महिला राजनेता, जानिए कोन हैं ये।

भारत की आज़ादी में जितना योगदान पुरूषों का था, उतना ही महिलाओं का भी रहा. आबादी के हिसाब से महिलाओं की भागीदारी उतनी नहीं है, जितनी होनी चाहिए. हालांकि भारतीय राजनीति में महिलाओं का दबदबा बरकरार है. प्रधानमंत्री रह चुकीं इंदिरा गांधी हों या सबसे कम उम्र में चुनाव लड़ चुकी राखी बिड़लान, भारतीय राजनीति में संसद से लेकर सड़कों तक महिलाओं का बोलबाला रहा है. दुनिया भी देख रही है कि भारतीय राजनीति में महिलाओं की तूती बोलती है. आइए जानते हैं भारत की प्रमुख महिला राजनेताओं के बारे में जिनका वर्तमान में वर्चस्व है. 1. सोनिया गांधी- सोनिया गांधी का नाम भारत समेत कई देशों की ताकतवर महिलाओं में शामिल है. सोनिया गांधी 1997 से आज तक कांग्रेस अध्यक्ष हैं. वर्तमान में वे भारतीय राजनीति की एक स्तंभ हैं. 2. सुषमा स्वराज-भारतीय जनता पार्टी में पुरुषों के मुकाबले सुषमा स्वराज ने विदेश मंत्री बन महिलाओं की ताकत को बढ़ाया है. उन्हें देश में एक कद्दावर नेता के रूप में भी देखा जाता है. 3. महबूबा मुफ्ती-भारत की सियासत के जाने-माने चेहरों में से एक नाम महबूबा मुफ्ती का है. महबूबा जम्मू-कश्मीर की पीपुल्स...

एक और संस्कारी पुरुष श्री मान एन डी तिवारी जी बीजेपी में शामिल। चाल, चरित्र,और चेहरा आपके सामने है!!

एक और संस्कारी पुरुष भरस्टाचार की जननी कहलाये जाने वाली पार्टी कांग्रेस से पवित्र गंगा मने जाने वाली भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए। वैसे संस्कारी पुरुष से आप समझ ही गये होंगे की मैं एन डी तिवारी की बात कर रहा हूँ। इन डी तिवारी वो नेता है जिन्हें 80 साल की उम्र में पुत्र प्राप्ति हुई।बड़ी क़ानूनी लड़ाई के बाद नाज़ायज़ औलाद को अपनाना पड़ा। बीजेपी के पास  अपना कोई नेता नही रह गया है ।सबका जुगाड़ किसी और दल जैसे बसपा,कांग्रेस,सपा और अन्य दूसरे दलों से करना पड़ रहा है जिन्हें बीजेपी पहले से ही भर्स्ट मानती आयी है। बीजेपी को यूपी में राजा भैया से भी कोई परहेज नही! । असलियत आपके सामने है आँखों से बंधी पट्टी हटाओ और ऐसी पार्टियों और नेताओं का खुल के विरोध करो ताकि आगे कोई भी पार्टी ऐसे नेताओं को अपनी पार्टी से सीट देने में घबराये। Bharat ki rajneeti

सिध्दू जी का हाल ऐसे हो गया जैसे खजूर से टपका झाड़ में जा गिरा।

सिद्धू जी ने जैसे ही कांग्रेस का हाथ थामा बीजेपी हमलावर हो गयी।कहने लगी है की इन्होंने तो कांग्रेस के खिलाफ बहुत कुछ बोला है ,क्या बीजेपी में शामिल दूसरे दलों के नेताओ ने बीजेपी में आने से पहले उनका महिमामंडन किया था। राजनीती की कोई  जात नही रह गयी आज कल ,एक रात में लोगो का ज़मीर और विचारधारा बदल जाती है। जब राष्ट्रवादी बीजेपी और अलगाववादी समर्थक पीडीपी का गठबंधन हो सकता है तो देश में कुछ भी हो सकता है। सिद्धू जी पंजाब,पंजाबियत या पंजाब के लिए उनसे हाथ मिला बैठे जो 1984 के सिख दंगो के दोषी हैं। राजनीती ऐसी ही होती है दोस्तों

फिर से जनता को चुनावी लॉलीपॉप देते हुए मोदी जी, वो बताने को तैयार नही की कितना कालाधन सरकार को नोटबंदी से मिला और देश को क्या फायदा हुआ।

अच्छे दिन तो आ गए लेकिन कोहरे की वजह से दिख नही रहे हैं-भक्त

कल की गिरफ्तारियों को देखकर लगता है कि जैसे सरकार 8 सिमी आतंकवादियों के एनकाउंटर को दबाने की कोशिश कर रही है

कल की गिरफ्तारियों को देखकर लगता है कि जैसे सरकार 8 सिमी आतंकवादियों के एनकाउंटर को दबाने की कोशिश कर रही है

Search Here