एक थप्पड़ को लेकर सीऍम ऑफिस को पुलिस ने घेरा ,लेकिन जज लोया की मौत पर पूछताछ तक नहीं ,लगता है भारत में लोकतंत्र की अर्थी उठ चुकी है ?

मुख्यमंत्री आवास पर मुख्य सचिव अंशु प्रकाश के साथ हुई कथित बदसलूकी मामले में अब सरकार और दिल्ली पुलिस आमने-सामने है. अभी तक दिल्ली पुलिस की तरफ से इस मामले में दो आम आदमी पार्टी के विधायकों और प्रर्दशन के दौरान कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया. दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार सुबह मुख्यमंत्री आवास को घेर लिया. एडिशनल डीसीपी हरिंदर सिंह की अगुवाई में पुलिस मुख्यमंत्री आवास में घुसी.
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दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई पर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पलटवार किया है. "उन्होंने कहा जितनी शिद्दत के साथ इस पूरे मामले की जांच की जा रही है, मुझे बेहद खुशी है जांच होनी चाहिए. लेकिन मैं जांच एजेंसियों से कहना चाहता हूं कि जज लोया के कत्ल की जांच पर अमित शाह से पूछताछ करने की हिम्मत दिखाए तो देश उनको बधाई देगा''

अगले ट्ववीट में उन्होंने कहा कि "ख़ूब पूलीस मेरे घर भेजी है। मेरे घर की छानबीन चल रही है। बहुत अच्छी बात है 
पर जज लोया के क़त्ल के मामले में अमित शाह से पूछताछ कब होगी?"

इसके बाद एक ट्वीट और करते हुए उन्होंने कहा कि "दो थप्पड़ के आरोप की जाँच के लिए CM के पूरे घर की तलाशी। जज लोया के क़त्ल पर पूछताछ तो बनती है। नहीं?"

मुख्यमंत्री कार्यालय की तरफ से आरोप लगाया गया है कि पुलिस बिना किसी सूचना के उनके आवास पर पहुंची है. उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के मीडिया एडवाइज़र अरुणादेय ने ट्वीट कर बताया कि सीएम आवास को पुलिस ने अपने अंडर में लिया है, काफी संख्या में पुलिस फोर्स घर में घुसी है.
उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस राज में लोकतंत्र की हत्या की जा रही है. क्या एक चुने हुए सीएम के साथ इस प्रकार का व्यवहार सही है.इस कार्यवाही को देखकर लगता है कि हमारे देश में सभी कानून गरीब या कमजोर आदमी पर लागु होते है अमीर और रसूखदार लोग कानून की सरेआम धज्जियाँ उड़ाते है जैसे नीरव मोदी और विजय माल्या

सच कहा है ईमानदारी से लड़ने के लिए सारी आसुरी शक्तियाँ एक हो जाती है जो अब देखने को भी मिल रहा है !

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