क्या है जल्लिकट्टू महोत्सव और क्यों मचा है घमासान? पूरा पढ़ें।
इस समय तमिलनाडु के मशहूर बैल दौड़ यानी 'जल्लिकट्टू महोत्सव' को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी है जिसके बाद इसे लेकर तमिलनाडु में विरोध हो रहा है।
क्या है जल्लिकट्टू महोत्सव? जल्लिकट्टू महोत्सव, तमिलनाडु के पोंगल पर्व पर मट्टू पोंगल के दिन होने वाला बैलों की दौड़ वाला महोत्सव है।
इस दौड़ में बिना लगाम के बैल दौड़ते हैं जिन्हें लोग रोकने की कोशिश करते हैं।
जो बैलों पर लगाम कस लेता है वो विजयी हो जाता है।
Read In English Jallikattu is an ancient bull taming ritual required for reproduction of cows and bulls which is required Tamil Nadu as part of Pongal celebrations on Mattu Pongal day.
क्या है जल्लिकट्टू महोत्सव? जल्लिकट्टू महोत्सव, तमिलनाडु के पोंगल पर्व पर मट्टू पोंगल के दिन होने वाला बैलों की दौड़ वाला महोत्सव है।
इस दौड़ में बिना लगाम के बैल दौड़ते हैं जिन्हें लोग रोकने की कोशिश करते हैं।
जो बैलों पर लगाम कस लेता है वो विजयी हो जाता है।
Read In English Jallikattu is an ancient bull taming ritual required for reproduction of cows and bulls which is required Tamil Nadu as part of Pongal celebrations on Mattu Pongal day.
क्यों लगाई रोक? दरअसल इस महोत्सव को लेकर एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था जिसमें दिखाया गया था कि महोत्सव से पहले बैलों को शराब पिलाई जाती है। बैलों को निर्दयता पूर्वक मारा जाता था
बैलों को मारा जाता है जिसके कारण जब दौड़ शुरू होती है तो वो गुस्से में बेतहाशा दौड़ते हैं।
रोक लगाने की मांग इस वीडियों के बाद एनीमल वेल्फेयर बोर्ड ऑफ इंडिया, पीपुल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनीमल्स (पेटा) इंडिया और बैंगलोर के एक एनजीओ ने इस दौड़ को रोकने के लिए याचिका दायर की।
जल्लिकट्टू महोत्सव पर रोक जिस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने जल्लिकट्टू महोत्सव पर रोक लगा दी है। यह रोक केवल तामिलनाडु में ही नहीं बल्कि पूरे देश में लागू होगी।
सरकार से मांगा जवाब चूंकि इस विवादित दौड़ पर से केंद्र सरकार ने 7 जनवरी को रोक हटा दी थी इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र के आदेश को रोक दिया है और साथ ही एक हफ्ते के भीतर तमिलनाडु, महाराष्ट्र और केंद्र सरकार से जवाब मांगा है।
जल्लीकट्टू को लेकर तमिलनाडु में अब भी उबाल जारी है. इसके समर्थन में चेन्नई के मरीना बीच पर हजारों की संख्या में लोग अब भी जुटे हुए हैं. आज भी यहां जल्लीकट्टू के समर्थन में प्रदर्शन हो रहा है. नाच-गाकर, नुक्कड़ नाटक के जरिए प्रदर्शनहो किया जा रहा है. वहीं केंद्र सरकार ने भी इस मामले के हल के लिए हरसंभव प्रयास की बात कही है.
केंद्र सरकार की ओर से जल्लीकट्टु पर अध्यादेश को मंजूरी दिए जाने के एक दिन बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज इसे लेकर ट्वीट किया. पीएम ने लिखा- तमिलनाडु के समृद्ध संस्कृति पर हमें बहुत गर्व है. तमिलनाडु के लोगों की सांस्कृतिक आकांक्षा को पूरा करने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे. केंद्र सरकार तमिलनाडु की प्रगति के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और हम इसे विकास की नई राह की ओर ले जाने का कार्य जारी रखेंगे.
Tweet by Narender Modi on Jallikattu
We are very proud of the rich culture of Tamil Nadu. All efforts are being made to fulfil the cultural aspirations of Tamil people.
Tweet by Narender Modi on Jallikattu
We are very proud of the rich culture of Tamil Nadu. All efforts are being made to fulfil the cultural aspirations of Tamil people.
Central Government is fully committed to the progress of Tamil Nadu & will always work to ensure the state scales new avenues of progress.
Narendra Modi
जल्लीकट्टू के आयोजन की इजाजत देने के लिए केंद्र ने तत्परता दिखाते हुए अध्यादेश के मसौदे को मंजूरी दी जिसके एक ही दिन बाद यह वक्तव्य आया है. इसके साथ ही राज्य में बीते पांच दिनों से चले आ रहे व्यापक विरोध प्रदर्शनों को खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ते हुए तमिलनाडु के लिए इस अध्यादेश को लागू करने का रास्ता साफ हो गया.
वहीं, कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि हम चाहते हैं कि प्रथा का भी ध्यान रखा जाए. हम उन युवको का भी सम्मान करते हैं जो इसमें लगे हैं. राज्य सरकार और केंद्र सरकार मिलकर इसका हल निकाल रहे हैं. हम चाहते हैं कि प्रथा भी बनी रहे और कोई कानूनी हल निकल आए.
केंद्रीय गृह मंत्रालय, कानून मंत्रालय और पर्यावरण मंत्रालय ने अध्यादेश को कल रात ही मंजूरी दे दी। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ओ. पनीरसेल्वम ने दो दिन पहले मोदी से मुलाकात कर उनसे अध्यादेश को मंजूरी देने का अनुरोध किया था.
जल्लीकट्टू के समर्थन में आज डीएमके नेता एमके स्टालिन और कनिमोझी एक दिन की भूख हड़ताल पर बैठ रहे हैं. इससे पहले कल भी स्टालिन ने इसे लेकर विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया था.


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