सिध्दू जी का हाल ऐसे हो गया जैसे खजूर से टपका झाड़ में जा गिरा।
सिद्धू जी ने जैसे ही कांग्रेस का हाथ थामा बीजेपी हमलावर हो गयी।कहने लगी है की इन्होंने तो कांग्रेस के खिलाफ बहुत कुछ बोला है ,क्या बीजेपी में शामिल दूसरे दलों के नेताओ ने बीजेपी में आने से पहले उनका महिमामंडन किया था।
राजनीती की कोई जात नही रह गयी आज कल ,एक रात में लोगो का ज़मीर और विचारधारा बदल जाती है।
जब राष्ट्रवादी बीजेपी और अलगाववादी समर्थक पीडीपी का गठबंधन हो सकता है तो देश में कुछ भी हो सकता है।
सिद्धू जी पंजाब,पंजाबियत या पंजाब के लिए उनसे हाथ मिला बैठे जो 1984 के सिख दंगो के दोषी हैं।
राजनीती ऐसी ही होती है दोस्तों
राजनीती की कोई जात नही रह गयी आज कल ,एक रात में लोगो का ज़मीर और विचारधारा बदल जाती है।
जब राष्ट्रवादी बीजेपी और अलगाववादी समर्थक पीडीपी का गठबंधन हो सकता है तो देश में कुछ भी हो सकता है।
सिद्धू जी पंजाब,पंजाबियत या पंजाब के लिए उनसे हाथ मिला बैठे जो 1984 के सिख दंगो के दोषी हैं।
राजनीती ऐसी ही होती है दोस्तों

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