चुनावी जुमला है बुलेट ट्रेन, किसी जापानी कंपनी के साथ कोई समझौता नहीं हुआ -आरटीआई से हुआ खुलासा

2014 में किये गए सारे वादे जुमला साबित हो रहे है। राजनीति में इस जुमलेबाजी का स्तर इतना बढ़ गया है कि राज्यों की रैलियों से लेकर अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भी इसे अंजाम दिया जा रहा है।

हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी जापान के प्रधानमंत्री शिंज़ोआबे के साथ गुजरात के अहमदाबाद की यात्रा पर गए थे। वहां उन्होंने कहा कि जापान के साथ मिलकर मुंबई से अहमदाबाद तक बुलेट ट्रेन बनाने जा रहे हैं।
उन्होंने 2014 लोकसभा चुनाव में बुलेट ट्रेन बनाने का वादा किया था लेकिन इसकी घोषणा अब गुजरात विधानसभा चुनाव से कुछ समय पहले की। इसके बाद भाजपा ने गुजरात में सड़क से सोशल मीडिया तक बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट को जमकर भुनाया

गुजरात की जनता ने भी इस पर भरोसा किया क्योंकि पीएम मोदी जापान के प्रधानमंत्री के साथ ये घोषणा करने अहमदाबाद गए थे लेकिन अब जो बात सामने आई है वो चौंकाने वाली है।

एक आरटीआई के मुताबिक सितंबर 2017 में मोदी और आबे की मुलाक़ात के दौरान कोई भी जापानी कंपनी से बुलेट ट्रेन बनाने के लिए कोई समझौता नहीं किया गया है।

आरटीआई में कहा गया है कि 14 सितम्बर 2014 को पीएम मोदी के जापान दौरे के दौरान बुलेट ट्रेन बनाने के लिए किसी जापानी कंपनी के साथ एमओयू (समझौता) पर हस्ताक्षर नहीं किये गए हैं।
इस आरटीआई के बाद साफ़ होता है कि इस बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट को लेकर कोई समय सीमा निश्चित नहीं है। इसमें कितना भी समय लग सकता है। ये ट्रेन बनेगी भी या नहीं अब इसमें भी संदेह है। सवाल ये है कि क्या बुलेट ट्रेन सिर्फ गुजरात चुनाव के लिए एक जुमला था?

गुजरात में प्रोजेक्टों के नाम पर वोट बटोरना भाजपा की पुरानी राजनीति का हिस्सा रहा है। वर्ष 2002 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात में मेट्रो बनाने का वादा किया था। तब से अबतक उन्होंने मुख्यमंत्री से प्रधानमंत्री तक का सफ़र तय कर लिया लेकिन गुजरात की जनता आजतक मेट्रो का सपना ही देख रही है।

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