हरियाणा के रेवाड़ी में स्कूल अपग्रेड की मांग पर छात्राओं का धरना तीसरे दिन भी जारी-स्कूल की मांग को लेकर पिछले 4 दिन से हैं अनशन पर
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा देने वाली बीजेपी सरकार में मासूम छात्राएं स्कूल को 12Th तक बढ़ने की मांग को लेकर पिछले कुछ दिनों से अनशन पर हैं लेकिन पिछले कुछ दिनों से सरकार के कान पर जूं तक नहीं रेंगी है
रेवाड़ी के गोठड़ा टप्पा डहेना गांव की करीब 80 स्कूली छात्राएं बुधवार 10 मई से भूख हड़ताल पर बैठी हैं. उनकी मांग है कि उनके गांव के सरकारी स्कूल को 10वीं कक्षा से बढ़ाकर 12वीं तक किया जाए.इस तरह मोदी जी द्वारा दिया गया बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा झूठा सा नज़र आ रहा है
पर इस मांग के लिए भूख हड़ताल की ज़रूरत क्यों पड़ी?
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार गांव में स्कूल न होने के चलते इन लड़कियों को 3 किलोमीटर दूर दूसरे गांव के स्कूल जाना पड़ता है, जहां रास्ते में आते-जाते अक्सर ही उन्हें छेड़छाड़ का सामना करना पड़ता है. लड़कियों का कहना है कि उन्होंने गांव के सरपंच से भी शिकायत की थी, जिन्होंने इस मामले को आगे भी बढ़ाया पर कोई हल नहीं निकला. इसलिए लड़कियों ने यह मांग उठाई है कि उनके गांव के ही स्कूल को बारहवीं कक्षा तक अपग्रेड किया जाए और इसी मांग की पूर्ति के लिए वे भूख हड़ताल कर रही हैं.
छात्राओं की बिगड़ती तबीयत को देखते हुए कोसली विधायक बिक्रम ठेकेदार आश्वाशन पर धरना ख़त्म कराने पहुंचे, लेकिन छात्राओं ने आश्वाशन पर विश्वाश करने से इंकार कर दिया। बिक्रम ठेकेदार ने कहा की छात्राओं की मांग जायजा है और उन्होंने शिक्षा मंत्री से बात की है। गांव के स्कूल में बच्चों की संख्या में बढ़ोतरी होने पर वे स्कूल को अपग्रेड करा देंगे।
बता दें कि गांव में दसवीं तक स्कूल है और 11वीं 12वीं कक्षा पढ़ने के लिए पडो़सी गांव जाना होता है। यह गांव 3 किलोमीटर दूर है। छात्राओं का कहना है कि असामाजिक तत्व आए दिन उनसे छेड़छाड़ करते हैं और जब घर वालोंं को ये सब बताते हैं तो वो कहते हैं स्कूल जाना छोड़ दो। जिसके बाद छात्राओं ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल स्कूल अपग्रेड करने की मांग को लेकर भूख हड़ताल शुरू कर दी।
गांव के सरपंच सुरेश चौहान का कहना है कि वो पहले भी प्रशासन को बार बार लिख चुके हैं कि छात्राओं के साथ छेड़छाड़ होती है और गाँव के स्कूल को अपग्रेड किया जाए लेकिन लम्बा समय बीतने के बाद समाधान ना होने पर छात्राओं ने खुद ही अपना हक़ लेने का फैसला किया है।


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