भकतों की कहानी भक्त की जुबानी

भकतों की कहानी भक्त की जुबानी -
नाकामी हुजूर की छिपाता रहूँगा,
तारीफों के बंगले बनाता रहूँगा,
बेच दे वे देश चाहे अम्बानी या माल्या को,
पर मैं भक्त हूँ,नमो-नमो गाता रहूँगा.
जीडीपी गिर रहा है,पर मुझे उस से क्या,
बेरोजगार बढ़ रहे हैं,पर मुझे उस से क्या,
“अच्छे दिन” जुमला था,भले मान लिया हो मेरे देवताओं ने,
मतलब “अच्छे दिन” अब नहीं आएँगे,पर मुझे उससे क्या,
मैं तो “मन की बात” सुन-सुन कर खुशी से पगलाता रहूँगा,
क्योंकि भक्त हूँ,नमो-नमो गाता रहूँगा.
केजरीवाल गद्दार है,क्योंकि प्रभु से सवाल करता है,
कपिल देशद्रोही है,क्योंकि सच बोल कर बवाल करता है,
भले ही वाड्रा और सोनिया सबूत होने के बाद भी बाहर घूम रहे हों,
पर हर वो आधारकार्ड धारक पाकिस्तानी है,जिसे इस बात का मलाल रहता है,
अपना हक मांगने वाले हर भारतीय के लिए मैं नयी-नयी गालियाँ बनाता रहूँगा,
क्योंकि भक्त हूँ,नमो-नमो गाता रहूँगा.
लीला देखो प्रभु की के चाय बेच कर करोड़ो कमाए,
तभी तो घूमते हैं लाखों का सूट और हजारों का चश्मा चढ़ाए,
पप्पू तो पागल है जो गरीबों की थाली में भी खा लेता है,
वरना ये कहाँ की समझदारी है की कोई करोड़ो बनाए और गरीबों के जख्मों पर मरहम भी लगाए,
मौका मिले तो “राम” और “कृष्ण” आपके ही अवतार थे,सबको यहीं समझाता रहूँगा,
क्योंकि भक्त हूँ,नमो-नमो गाता रहूँगा.
लाइन में लग कर पप्पू पब्लिसिटी स्टंट करता है,
फटा हुआ कुरता दिखा कर जनता को तंग करता है,
गोवा रैली में उनके आँखों से बही जिस अमृत धारा पर भड़क उठे विपक्षी,
प्रभु की उस एक्टिंग पर मेरे जैसा हर भक्त मरता है,
उनके हर फेंके जुमले पर मैं यूँ ही ताली बजाता रहूँगा,
क्योंकि भक्त हूँ,नमो-नमो गाता रहूँगा.

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